कृतज्ञता (Gratitude, Thankfulness)

Published by indertanwar397 on

कृतज्ञता (Gratitude, Thankfulness) 

  • मनुष्य एक सामाजिक प्राणी हैं। सामाजिक सहयोग और प्रकृति के साथ उचित तालमेल के कारण ही हम एक बेहतर और सुंदर जीवन जीते हैं और बड़े आराम से रहते हैं। 

  • अब सवाल ये है कि क्या हमें समाज और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता प्रकट करनी चाहिए?


  • बेशक।

  • इस जीवन को बेहतरीन बनाए रखने के लिए हमें न केवल समाज और प्रकृति के प्रति आभारी रहना होगा बल्कि प्रत्येक उस व्यक्ति के प्रति भी आभार व्यक्त करना होगा जिनसे हमें कुछ भी अच्छा सीखने को मिला है। कृतज्ञता श्रेष्ठ गुणों में से एक है। और प्रत्येक व्यक्ति में यह गुण होता है। आगे बढ़ने और ज्यादा पाने की लालसा में हममें ये गुण कम होता जा रहा है। इस विषय पर हमें गंभीरता से सोचना होगा। बिना गुणों और संस्कारों के हम न तो खुद आगे बढ़ पाएंगे और न ही अगली पीढ़ी को कुछ सीखा सकेंगे।


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  • हमें अपने सुन्दर जीवन के लिए सबसे पहले ईश्वर के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करनी होगी, फिर हमें भोजन, हवा और पानी के प्रति भी धन्यवाद व्यक्त करना होगा। भले ही ये सब हमें बेकार लगता हो लेकिन ये एक अनिवार्य शर्त है।

  • ज्यादा से ज्यादा प्रकृति के नजदीक रहने की जरूरत है तभी हम प्रकृति के महत्व को समझ सकेंगे।



 

Categories: Self-help

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