खुशी की अवधि हमारे लिए क्यों महत्वपूर्ण है? (Why the happiness period is important for us?)

Published by indertanwar397 on

 


दूसरों को खुश देखकर खुश रहने की कला अपने अंदर विकसित करने का प्रयास करना होगा।

खुशी की अवधि हमारे लिए क्यों महत्वपूर्ण है? क्योंकि ख़ुश रहना हमारे लिए दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण कार्यों में से एक है‌ इस दुनियां में हर कोई खुद को विभिन्न साधनों के माध्यम से खुश रखने का प्रयास करता है। किसी को टीवी देखना अच्छा लगता है तो कोई फ़ोन में खुशी की तलाश कर रहा है। सभी किसी न किसी बहाने से अपने आप को और बेहतर बनाने में लगा हुआ है। क्योंकि हम सब का अंतिम उद्देश्य खुश रहना ही हैं। खुशियां तो हम सबके पास आती है लेकिन वो हमें व्यस्त (बिज़ी) देखकर लौट जाती हैं।इस दुनियां में कोई भी व्यक्ति ऐसा नहीं जो कभी खुश न रहा हो। खुश रहना और खुशियों को बढ़ाना हमारे खुद के हाथ में ही है। खुश रहने के लिए हमें ज्यादा कुछ करने की आवश्यकता नहीं है।

सबसे आसान और बेहतर तरीकों में से एक है दूसरों को खुश देखकर खुश रहने की कला अपने अंदर विकसित करने का प्रयास करें। हमारे पास भी है वो सभी आवश्यक चीजें हैं जो हमारी महत्वकांक्षाओं को पूरा करने में हमारी सहायता कर सकती है और जिसके लिए हमें दूसरों से शिकायत होती हैं। इसके लिए हमें खुश रहना सीखना होगा और छोटी छोटी खुशियों का उत्सव मनाने की भी जरूरत है। बड़ी खुशी के चक्कर में नन्ही खुशी को इग्नोर करना समझदारी नहीं है। जिस प्रकार छोटे छोटे प्रयासों से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है ठीक उसी तरह छोटी छोटी खुशियों में खुश रहकर हम अपने जीवन को सुखमय और खुशियों से भरपूर बना सकते हैं।

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खुद पर भरोसा करने वाले हमेशा खुश और संतोषप्रद जीवन व्यतीत करते हैं। 

खुशी की अवधि हमारे लिए क्यों महत्वपूर्ण है? जितना ज्यादा समय तक हम खुश रहते तब तक हम एक बेहतरीन इंसान होते हैं। एक खुशमिजाज आदमी किसी भी तरह की नकारात्मकता से हमेशा बच कर रहता हैं। क्योंकि उसको जीवन की क्षणभंगुरता का पता होता हैं। हमें खुद के साथ रिसर्च (अनुसंधान) करने की आवश्यकता है। क्या हम हफ्ते या महिने में किसी एक दिन का व्रत ( Fast) कर सकते है जिस दिन हम केवल वही काम करेंगे जो हमें बुनियादी रूप से करने की आवश्यकता है? इससे हमें हमारी क्षमताओं का पता चलता है।

बड़ी बड़ी आशाएं अक़्सर हमेशा निराश करती हैं अगर उनके लिए नियमित रूप से कार्य न किया जाए। बार बार अपने लक्ष्यों को बदलने से ज्यादातर मामलों में हमें निराशा का सामना करना पड़ता हैं। निरंतरता एक महत्वपूर्ण पहलू है जो हमें अपने विचारों और कार्यों को सकारात्मक दिशा में ले जाने में हमारी सहायता करता है। दुःखी और परेशान वहीं लोग होते है जिनको अपने आप से ज्यादा कुछ उम्मीद नहीं होती। खुद पर भरोसा करने वाले हमेशा खुश और संतोषप्रद जीवन व्यतीत करते हैं।

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दूसरों को देखकर भी सीखा जा सकता है। 

खुशी की अवधि हमारे लिए क्यों महत्वपूर्ण है? उससे नियमित रूप से बात करने का प्रयास किया जा सकता है। एक शक्ति जो पूरे विश्व को संचालित करती है जिसे हम ईश्वर, परमात्मा, प्रकृति जिस भी नाम से संबोधित करते है। क्या हमें उसके प्रति सम्मान, कृतज्ञता की भावना रखनी चाहिए? जी हां । मानसिक शांति और अच्छे स्वास्थ्य के लिए कुछ समय परमात्मा को देना होगा। भागदौड़ भरी जिंदगी में भगवान को अपना साथी दोस्त बना लेना बड़ी राहत देता है। सीखने के दो तरीके हो सकते है या तो हम खुद को पूरा झोंक दे सीखने में, कुछ नया करने में या फिर दूसरों को देखकर भी सीखा जा सकता है। ज्यादातर लोग दूसरों को देखकर ही सीखते है लेकिन वो एक जगह पर चूक जाते है

वो जिनसे प्रेरणा लेते है, जो व्यक्ति उनमें उत्साह का संचार करता है वो उनकी तरह ही बनना चाहते हैं। इस असंभव काम को करने की ललक में हम अपनी क्षमताओं को जीवन भर अनदेखा करते रहते हैं। अगर गुलाब का फूल कहे कि मैं कमल के फूल जैसा बनना चाहता हूं, घास अगर बरगद के पेड़ जैसा बनना चाहें तो क्या यह संभव है? नहीं, क्योंकि सबकी अपनी अपनी क्वालिटी है। कोई किसी दूसरे जैसा कैसे बन सकता है? ईश्वर ने हम सबको अदभुत, अद्वितीय बनाया है। हमारी सबकी अपनी-अपनी क्षमताएं है। सबमें एक अनूठापन है जो किसी की नकल नहीं है। अपनी इस काबिलियत को पहचानना होगा।

इन सब विषयों पर चिंतन करने की आवश्यकता है। हमारी शिक्षा प्रणाली में भी इस तरह के पाठ्यक्रमों को अपनाएं जाने की आवश्यकता है। ताकि हम किसी और जैसा नहीं खुद अपने जैसा बनने की कोशिश करें। ऐसा करके ही हम हमेशा खुश रह पाएंगे। 

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हमें अपने विचारों के प्रति भी सतर्क रहने की आवश्यकता है ।

खुशी की अवधि हमारे लिए क्यों महत्वपूर्ण है? ये हमारे विचार ही है जो सुख और दुःख से हमारा परिचय करवाते हैं। विचारों से हमारी भावनाएं और भावनाओं से धारणा। और इन्हीं धारणाओं के आधार पर हमारा भविष्य का निर्धारण होता हैं। जब हम किसी के प्रति धारणा बना लेते है कि फलां व्यक्ति अच्छा है या बुरा है तो हमारे मन में उसके लिए उसी तरह के विचार उत्पन्न होंगे। जिस प्रकार गाड़ी चलाते समय किसी व्यक्ति को सतर्क रहना पड़ता है, थोड़ा सा ध्यान हटते ही दुर्घटना की संभावना बढ़ जाती है

उसी तरह हमें अपने विचारों के प्रति भी सतर्क रहने की आवश्यकता है क्योंकि बुरे विचार हमें जल्दी आकर्षित करते है। अच्छे विचारों को अपने व्यवहार में शामिल करना पड़ता है। अच्छे विचारों से ही हमेशा माहौल खुशनुमा बनता है।

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हार जाने के बाद भी ख़ुश रहने वाले लोगों ने ही दुनिया के महानतम काम किए हैं।

खुशी की अवधि हमारे लिए क्यों महत्वपूर्ण है? भाग्य पर जितना ज्यादा भरोसा करेंगे उतना ही पीछे धकेल दिए जाएंगे उनके द्वारा जो काम पर ज्यादा फोकस करते हैं। और जितना ज्यादा पीछे होंगे निराशा उतनी ज्यादा होगी, खुश रहने का ग्राफ कम होता जाएगा।  यह आगे पीछे की दौड़ हमारे स्वभाव और विचारों पर आधारित है। हार जाने के बाद भी ख़ुश रहने वाले लोगों ने ही दुनिया के महानतम काम किए हैं। खुश रहना हमारा प्राकृतिक अधिकार है। इसको हमसे कोई नहीं छीन सकता, हम खुद भी नहीं। और ज्यादातर मामलों में हम खुद ही अपने आपको इस अधिकार से वंचित कर लेते हैं। हम खुद को डिजाइन कर सकते हैं। खुद में बदलाव ला सकते है। अगर हमें पता हो कि आखिरकार हम चाहते क्या है इस जीवन से? 

जिस भी प्रेरणादायक विषय पर आप पढना चाहते है आप हमें बताएं। हम आपकी पसंद के विषय पर जरूर आर्टिकल लिखेंगे।

टिप्पणियां अवश्य दें।

धन्यवाद 🙏

 


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