ज़िन्दगी में ख़ुशियाँ कहाँ पाऊँ। (Where I can find happiness in my life)

Published by indertanwar397 on

 



प्रकृति के साथ समय बिताना बेहद रोमांचक होगा।

ज़िन्दगी में ख़ुशियाँ कहाँ पाऊँ। खुशियां तो हमारे अंदर ही मौजूद हैं। हम जीवन भर उनको बाहर ढूंढते रहते हैं। जीवन में हम  छोटी छोटी बातों को अपनाकर ढेरों खुशियां हासिल कर सकते हैं। किसी जरूरतमंद की मदद करने से होने वाली ख़ुशी बेशकीमती और स्वाभाविक होती हैं। इस बहुमूल्य चीज का अनुभव करना अपने आप में एक अद्भुत बात है। और इसका अहसास हम सबने अपने जीवन में किसी न किसी रूप में जरूर किया है। प्रकृति के साथ समय बिताना बेहद रोमांचक होगा। क्योंकि हम सब प्रकृति का ही हिस्सा हैं। पेड़ पौधों से हमें मानसिक शांति मिलती है। जिस शांति की तलाश में हम जीवन भर आंखें बंद करके लगे रहते हैं और जिसको पाने के लिए हम दिन रात मेहनत करते हैं। दूसरों को खुशी देकर हम भी खुश रहने के अधिकारी बन जाते हैं। खुश रहने के लिए किसी विशेष अवसरों की जरूरत नहीं होती, सामान्य परिस्थितियों में भी परमात्मा को धन्यवाद देकर खुश रहा जा सकता हैं। चयन करने का अधिकार हमारे हाथ में ही होता हैं। इस लिए प्रयास यही होना चाहिए कि केवल अच्छी और सकारात्मक बातों को ही अपने अंदर जगह दें। ज़िन्दगी में ख़ुशियाँ कहाँ पाऊँ।

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क्या हम अपनी महत्वकांक्षाओं के विषय में नहीं जानते?

ज़िन्दगी में ख़ुशियाँ कहाँ पाऊँ। मेहनत तो सब करते है लेकिन एक व्यक्ति इतना कमाता है कि उसे जीवन पर्यन्त कुछ करने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती और दूसरा व्यक्ति दो समय की रोटी मुश्किल से कमा पाता है। ये भेद क्यों होता हैं? क्या हमारे अंदर कोई कमी है?  क्या हम अपनी महत्वकांक्षाओं के विषय में नहीं जानते? जानते है हम सब जानते है। हम ये भी जानते है कि लोग कितना संघर्ष करके अपने जीवन में सफलता प्राप्त करते हैं।  लेकिन अंतर सोचने के तरीकों का है, अन्तर आदतों का है, अंतर संतुष्टि का है, अंतर समय पर काम करने का है, अंतर जब तक कामयाब नही होते तब तक प्रयास करते रहने का हैं। ज्यादातर का ज्यादातर समय व्यर्थ कार्यों में व्यतीत होता है और फिर समय की दुहाई देते है कि अच्छी बातें, अच्छी आदतें अपनाना तो हम भी चाहते है लेकिन हमारे पास इतना समय ही नहीं है।   अपने लक्ष्यों को बार बार न बदलने का है। आदतों के बल पर ही हम अपने जीवन को निर्मित करते हैं। सबको सीमित समय दिया गया है। अब हमें निर्णय करना है कि हम अपने साथ कैसा सलूक करते हैं। हमें किसी विशेष कार्य हेतु संसार में भेजा गया है। खुश रहना और खुशियां बांटना। ज़िन्दगी में ख़ुशियाँ कहाँ पाऊँ।

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अगर हमने अच्छी आदतें नहीं अपनाई तो बुरी आदतें हमें अपना लेंगी।

ज़िन्दगी में ख़ुशियाँ कहाँ पाऊँ। हमारी सबसे महत्वपूर्ण बात है कि हम खुद में बदलाव ला सकते है। हम अपनी कीमत बढा सकते हैं। खुद को और ज्यादा बेहतर बनाकर हम अपने मूल्य को बढ़ा सकते हैं। हम आगे तो बढ़ना चाहते है लेकिन यह जानने की कोशिश नहीं करते कि कैसे अपने आप को और अधिक विकसित करें? आगे कैसे बढे?  अच्छी आदतें अपनानी होगी क्योंकि अगर हमने अच्छी आदतें नहीं अपनाई तो बुरी आदतें हमें अपना लेंगी। अच्छी आदतों को विकसित करना मुश्किल है लेकिन अगर कोशिश की जाएं तो किसी भी आदत को अपनाया जा सकता हैं। खुद से रोजाना सवाल पूछे कि आज हमने क्या नया सीखा? रोज कुछ नयापन हमारी उदासीन जिंदगी में रोनक ले आएगा। जब हम कुछ नई चीजें सीखते है तो हमारे अंदर आत्मविश्वास अपने आप ही बढ़ने लगता है। जिस प्रकार एक छोटा बच्चा साईकिल चलाना शुरू करता है शुरुआत में काफी दिक्कतें आती है, चोट भी लगती है तो भी उसके उत्साह में कोई कमी नहीं आती। और आखिरकार उसके द्वारा किए गए छोटे छोटे प्रयासों को सफलता मिलती है और उसका आत्मविश्वास बढ़ जाता हैं। आत्मविश्वास हमारा एक महत्वपूर्ण गुण है। इसमें निरंतर बढ़ोतरी के प्रयासों को किए जाने की आवश्यकता है। जिस प्रकार एक बूंद से नील नदी बन जाती है और दुनिया की सबसे बड़ी नदी कहलाती हैं ठीक उसी तरह हमारे द्वारा किए गए एक एक प्रयासों की भी हमें ब्याज सहित कीमत मिलेगी, लेकिन प्रयास अटल करने होंगे, बिना रूके करने होंगे। ज़िन्दगी में ख़ुशियाँ कहाँ पाऊँ।

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महानतम लोगों ने भी अपने जीवन में बुरी परिस्थितियों का सामना किया है।

ज़िन्दगी में ख़ुशियाँ कहाँ पाऊँ। परिस्थितियां बुरी से बुरी हो सकती है ये हमारे हाथ में नहीं है लेकिन हम उन परिस्थितियों का सामना कैसे करते हैं यह हमारे हाथ में है। परिस्थितियों कैसी भी हो हम उनका सामना करने में सक्षम होते हैं। दुनिया के महानतम लोगों ने भी अपने जीवन में बुरी परिस्थितियों का सामना किया है। उन्होंने शिकायत न करके हिम्मत हारे बिना खुद को मजबूत बनाते गए, समय का सदुपयोग करके ऐसे ऐसे कर गए जिन्हें जानकर लोग दांतों तले उंगलियां दबा लेते हैं। असंभव कुछ भी नहीं है। दुनिया की परवाह नहीं करनी वो तो अच्छी और बुरी दोनों बातों पर प्रश्न चिन्ह लगाएगी। लोग तो सवाल करेंगे ही,  गालियां भी देंगे, पीछे धकेलेंगे का काम भी करेंगे और वो सब काम करेंगे जो हमें आगे बढ़ने से रोकेंगे। क्या दुनियां के उन चुनिंदा लोगों ने दुनिया की बातें नहीं सुनी होंगी? क्या उनका मज़ाक नहीं उड़ाया होगा? सब कुछ सहन किया है उन लोगों ने भी। बिना कुछ किए ही सफलता नहीं मिल पाएगी। सीखने के लिए हमेशा तत्पर रहिए। अच्छी आदतें और बातें जहां से भी मिले ग्रहण कर लेनी होंगी। टालमटोल करना, शिकायतें करना, निंदा करना छोड़ना होगा। अपने आराम को थोड़ा विराम देना सीखना होगा। और मेहनत करने की आदत डालने की आवश्यकता है। हमें किसी ओर जैसा नहीं बनना। हमें किसी से प्रतिस्पर्धा नहीं करनी, हमें खुद से ही प्रतिस्पर्धा करने की आवश्यकता है। अपने को और ज्यादा बेहतर, और ज्यादा विकसित करने की आवश्यकता है। ज़िन्दगी में ख़ुशियाँ कहाँ पाऊँ।

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खुद को हर परिस्थिति में मोटिवेट और कांफिडेंस से भरपूर रखना होगा।

किताबें इंसान की सबसे अच्छी दोस्त होती है क्योंकि ये कभी धोखा नहीं देती और समय पर काम आती हैं। वास्तव में किताबें ही हमारे भविष्य का निर्धारण करती है। अपने कम्फर्ट ज़ोन को छोड़कर महत्वपूर्ण और जरूरी चीजों पर ध्यान देने की आवश्यकता है। हम पढ़ते हैं ताकि नौकरी हासिल कर सकें। बिल्कुल सही बात है। लेकिन हमारे संस्कार भी उतने ही आवश्यक है जितना आज के समय में नौकरी हासिल करना। अपने सीखने की आदत को कमजोर न होने दें। खुद को हर परिस्थिति में प्रेरित और आत्मविश्वास से भरपूर रखना होगा। सीखेंगे तभी तो आगे बढ़ेंगे। प्रेरणा से भरपूर किताबें पढ़ने की आदत विकसित करें और अपनी क्षमताओं को बेहतर से बेहतरीन बनाने का प्रयास किया जाना चाहिए। हालांकि, पढ़ना सबके बस की बात नहीं है। लेकिन फिर भी व्यक्तित्व विकास और आत्मविश्वास में वृद्धि करने के लिए हमें साहस, धैर्य, वीरता और शौर्य से भरपूर हमारे महान वीरों की जीवनियां पढनी होगी। केवल तभी हम अपने महान पूर्वजों और धरती के श्रेष्ठ लोगों जैसा शानदार और अद्भुत जीवन जी सकेंगे। ज़िन्दगी में ख़ुशियाँ कहाँ पाऊँ।

जिस भी प्रेरणादायक विषय पर आप पढना चाहते है आप हमें बताएं। हम आपकी पसंद के विषय पर जरूर आर्टिकल लिखेंगे।

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धन्यवाद 🙏


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