सफलता प्राप्ति में संस्कारों का महत्व। (Importance of sacraments in Success)

Published by indertanwar397 on

 

जीवन में आने वाली समस्याओं से घबराने की जरूरत नहीं है।

सफलता प्राप्ति में संस्कारों का महत्व। अनपढ़ वो नहीं जो पढ़ नहीं पाते बल्कि अनपढ़ वो लोग है जो सीखना नहीं चाहते। क्या हम हमेशा ही सोएं रहेंगे। कभी तो होश संभालना होगा। क्या जागरूक होना इतना मुश्किल काम है। एक छोटी सी चींटी हमें बहुत कुछ सीखाती है। वो हमेशा अनुशासन में चलती रहती है, कई तरह की बाधाओं और रूकावटों को बिना थके बिना रूके पार कर जाती और आखिरकार अपने लक्ष्य तक पहुंचने में कामयाब हो जाती हैं। सूर्य हमें देना सीखाता है और बदले में किसी से कुछ भी नहीं मांगता। इस विशेषता को अपने व्यवहार में शामिल करके हम अपने अंदर की नकारात्मकता को दूर करने में सक्षम बन सकते हैं।

हमें अपने जीवन में आने वाली समस्याओं से घबराने की जरूरत नहीं है। हम सब इन महत्वपूर्ण गुणों को अपने व्यवहार में शामिल करने की आवश्यकता हैं। ताकि हम अपने जीवन को और भी ज्यादा खुबसूरती और सहजता के साथ जी सकते हैं। इन विशेष गुणों के परिणामस्वरूप हमारे अंदर मौजूद संस्कार धीरे धीरे हमारे व्यवहार में शामिल होना शुरू कर देते हैं। सफलता प्राप्ति में संस्कारों का महत्व।

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आधुनिकीकरण के दौर में संस्कारों का स्तर गिरता जा रहा है।

सफलता प्राप्ति में संस्कारों का महत्व। हम किसी और जैसा बनना चाहते है। यह वास्तव में एक गंभीर समस्या है। कहावत भी है कव्वा चला हंस की चाल,..। यह समस्या बचपन से हमारे अंदर डाल दी जाती हैं। कि आगे बढ़ो खूब पैसे कमाओ। रुपए कमाना बहुत जरूरी है जीवन यापन करने के लिए। लेकिन रुपए कमाने की लालसा में हम अपने अंदर छिपी प्रतिभाओं को अनदेखा कर रहे है ये एक गंभीर अपराध है। आधुनिकीकरण के दौर में संस्कारों का स्तर गिरता जा रहा है। संस्कारों के बगैर हम चाहे कितना भी पैसा कमा ले, कितनी भी सफलता हासिल कर लें, सुखद और संतोषप्रद जीवन व्यतीत नहीं कर पाएंगे। अवगुण तो नाव में छेद के समान है जो छोटा हो या बड़ा एक न एक दिन नाव को डूबों देती हैं।

विकार उत्पन्न करने वाली चीजों और लोगों को अनदेखा करने की आवश्यकता है। अच्छे लोगों और अच्छे साहित्य की संगत से हम अपने अंदर के विकारों को अच्छे विचारों और संस्कारों के साथ बदल सकते हैं। सफलता का सच्चा आनंद तो सद्गुणों को अपने व्यवहार में शामिल करने से ही मिलता है। और इसमें बड़ों का आशीर्वाद मिल जाए तो फिर बात ही कुछ अलग होगी। सफलता प्राप्ति में संस्कारों का महत्व।

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हमें खुद के महत्व को समझने की आवश्यकता है।

सफलता प्राप्ति में संस्कारों का महत्व। कभी कभी खुद के अंदर झांकना महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता हैं। क्या हम दूसरों में कमियां ढूंढने, शिकायत और निंदा करने के लिए ही पैदा हुए हैं? क्या हम दुःख, चिंता और निराशाओं में ही अपने जीवन को व्यर्थ गंवा देंगे? नहीं हमारा जन्म एक बेहतर जीवन जीने के लिए हुआ है। वास्तव में हमें खुद के महत्व को समझने की आवश्यकता है, खुद में बदलाव करने की आवश्यकता है। हम चाहते है सामने वाला इंसान बदलेगा तब सुधार होगा लेकिन यह तो संभव ही नहीं है। हमें स्वयं को ही बुनियादी रूप से मजबूत बनाने की आवश्यकता है।

और ऐसा करने का उपाय है धीरे धीरे अभ्यास के द्वारा अपनी क्षमताओं को और ज्यादा बेहतर और सहज बनाया जाएं ताकि खुद के साथ साथ हम समाज को भी बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें। हर इंसान में कोई न कोई खूबी जरूर होती हैं। हमें सराहनीय कार्यों के लिए लोगों की तारीफ करना सीखना होगी। दूसरों को हमेशा ग़लत समझना या कम महत्व देना उचित नहीं होगा इसकी अपेक्षा इस भावना से शुरू करें की सामने वाला इंसान बहुत अच्छा है। इससे हमारे अंदर भी सकारात्मक ऊर्जा की बढ़ोतरी होती हैं। सफलता प्राप्ति में संस्कारों का महत्व।

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दूसरों की सहायता का इंतजार करने वाले हमेशा इंतजार करते रह जाते हैं।

सफलता प्राप्ति में संस्कारों का महत्व। पहल हमें ही करनी होगी। और जितना जल्दी पहल करेंगे उतना सफलता की संभावना बढ़ती जाएगी। किसी काम को शुरू करने के लिए दूसरों की सहायता का इंतजार करने वाले हमेशा इंतजार करते रह जाते हैं। हमें इंतजार नहीं शुरुआत करनी है, लोग पहले विरोध करेंगे फिर भूल जाएंगे और फिर अपने आप आपसे जुड़ते चले जाएंगे। हम शुरू करने से पहले ही सोचने लगते है कि लोग क्या सोचेंगे? अगर ये बात भी हम सोचेंगे तो लोग क्या सोचेंगे? इंतजार करने वालोें को उतना ही मिलता है जितना सफल लोग छोड़ कर जाते हैं। हमें स्वयं को तैयार करना होगा, काम को छोटा समझ कर अनदेखी करना समझदारी नहीं है। काम कोई छोटा बड़ा नहीं होता। इसलिए काम करने से पीछे नहीं हटना चाहिए।

जितना हम काम करते जाएंगे हमारा आत्मविश्वास उतना ही बढ़ता जाएगा और जितना हम विश्वास से भरपूर होंगे उतने ही अच्छे गुणों को धारण करने में सक्षम बनते जाएंगे। हमें अच्छे गुणों को विकसित करना ही होगा और कोई विकल्प नहीं है हमारे पास। क्योंकि घमंड और नकारात्मक ऊर्जा से भरपूर व्यक्ति निश्चित रूप से पतन की ओर जाता हैं। हमें अपने आप को बुरी एनर्जी और बुरी संगत से खुद को बचाएं रखने की आवश्यकता है। सफलता प्राप्ति में संस्कारों का महत्व।

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परमात्मा का स्मरण करना सर्वोत्तम होता है।

सफलता प्राप्ति में संस्कारों का महत्व। ईश्वर पर भरोसा रखें वहां से हमें कभी धोखा नहीं मिलेगा। अगर हम निराश हो, दुःखी या फिर किसी समस्या से जूझ रहे है तो परमात्मा का स्मरण करना सर्वोत्तम माना गया है। इससे कुछ और मिले ना मिले लेकिन मानसिक शांति जरूर मिलती हैं। अक्सर हम दूसरों से कुछ ज्यादा ही उम्मीदें लगा लेते हैं जिसका परिणाम हमारे भविष्य के लिए ज्यादा बेहतर नहीं होता। और यही वास्तव में हमारे दुःख और निराशा का कारण बन जाता हैं। हमें खुद से उम्मीद रखने की आवश्यकता है। पूर्णता पाने की इच्छा से ही हम निरंतर तनाव की ओर बढ़ते जा रहे हैं। परिस्थितियों के साथ सामंजस्य स्थापित करके हम तनाव से मुक्त हो सकते हैं। सुख में किसी को कोई समस्या नहीं होती हर किसी को दुख में ही ईश्वर नज़र आता हैं।

एक कहावत है अगर हम सुख में भी परमात्मा को याद करें, उसका धन्यवाद करें तो हमें दुख के समय को झेलने की शक्ति मिलती हैं।क्या जीवन के अंतिम पड़ाव (बुढ़ापे) में ही भगवान को याद करना चाहिए उससे पहले ईश्वर की कोई जरूरत नहीं है? हमें जीवन के हर पड़ाव में भगवान के प्रति आभार व्यक्त करने की आवश्यकता है। युवावस्था में हमें अपनी क्षमताओं को विकसित करने और अपनी महत्वकांक्षाओं को पूरा करने में समय लगाना होता है लेकिन अगर भगवान को साथ लेकर चलेंगे तो सफ़र ज्यादा बेहतर होगा। सफलता प्राप्ति में संस्कारों का महत्व। 

जिस भी प्रेरणादायक विषय पर आप पढना चाहते है आप हमें बताएं। हम आपकी पसंद के विषय पर जरूर आर्टिकल लिखेंगे।

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